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BHARAT ME LAGHU EVAM KUTIR UDHYOG KI STHITI : EAK ANUSHILAN

Journal: International Education and Research Journal (Vol.9, No. 2)

Publication Date:

Authors : ;

Page : 18-20

Keywords : उद्योग; इाकईयाँ; राष्ट्रीय आय; उत्पादन; श्रमशक्ति एवं रोजागार;

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Abstract

भारत एक विकासशील देश हैं। यहॉ की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती हैं। कृषि के पश्चात् लघु उद्योग ही हैं, जिस पर भारत की अधिकांश जनसंख्या आश्रित हैं। भारत मे ं प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता हैं। उनका समुचित उपयोग देश के आर्थिक विकास में चार चॉद लगा सकता हैं। प्राकृतिक संसाधनों का देश के आर्थिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान हैं। इनके समुचित दोहन से देश का तीव्र गति से विकास होगा। किसी भी देश के अर्थव्यवस्था के स्वरुप को समझने में औद्योगिक ने हेतु भी इसकी आवश्यकता होती हैं। अतः औद्योगिक ने हेतु दो भागों में उद्योगों को बांटा गया हैं। धु उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में मुख्य भुमिका अदा करता हैं। ये उद्योग कम से कम पूंजी निवेश की सहायता से अधिक से अधिक लोगो ं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करातें हैं।भारत में विशाल जनशक्ति की बहुलता हैं। इन जनशक्ति का प्रभाव देश में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही हैं। यदि जनसंख्या निष्क्रिय हैं, तो देश में बेरोजगारी के प्रतिशत में वृद्धि होगी। इसके विपरित यदि जनसंख्या सक्रिय हैं, तो देश का आर्थिक विकास अवश्य ही संभव हैं। वर्तमान में वृहद उद्योगो ने संपूर्ण जगत में अपना वर्चस्व बनाए रखा हैं, परन्तु लघु उद्योगों के महत्व को भी नकारा नही जा सकता हैं। यदि हमें हमारें देश को विकसित करना हैं, तो हमें लघु उद्योगों का विकास करना होगा। भारत को संपन्न देश बनाने हेतु लघु उद्योगों को वृहद उद्योगों के समान महत्व देना होगा।

Last modified: 2023-04-24 20:15:08