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राजस्थान के समकालीन कलाकारों पर लघु चित्रकला का प्रभाव

Journal: INTERNATIONAL JOURNAL OF RESEARCH -GRANTHAALAYAH (Vol.7, No. 11)

Publication Date:

Authors : ; ;

Page : 204-206

Keywords : राजस्थान; समकालीन; चित्रकला; प्रभाव;

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Abstract

समकालीन कला जो नित नवीन रूपों का सृजन कर एक अकल्पनीय संसार के सृजन में विश्वास रखती है जिसने अभिव्यक्ति के अनेक साधनों के मिश्रण से अपपनी अनुभूति को एक आकार प्रदान करने के साथ अन्य प्रयोगधर्मी विषयों से कला की दूरी को कम करने का भी कार्य किया है जिसका परिणाम है कि एक कलाकृति का निर्माण आज संगीत की धुन, इत्र की सुगंध एवं अन्य कई प्रकार के वातावरण का सृजन कर मनुष्य के मनोवैज्ञानिक प्रभावों को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का नवीन मार्ग प्रशस्थ हुआ। मनुष्य के जीवन में कोई भी प्रयोग या कार्य के पीछे हमेशा से ही किसी चीज का प्रभाव या प्रेरणा कार्य करती आयी है उसी प्रकार से अनेक समकालीन कलाकारों ने भारतीय लघु, चित्र परम्पपरा से प्रभावितत होकर अपनी कला शैली का विकास कर नवीन रूपों के सृजन के साथ-साथ भारतीय चित्रकला की अमूल्य धरोहर को बदलतते परिवेश में गति प्रदान करने का कार्य किया है। छोटे-छोटे पारस्परिक रूप-रंग, विधि में बने लघु चित्रों के संसार को समकालीन कलाकारों ने कैनवास एवं तैल रंगों की दुनियां में प्रवेश कराकर समकालीन एवं पारस्परिक आकारों के समिश्रण से अद्भुत चित्र रुपों की रचना करने में सफल रहा है। इस प्रकार के कला रूपों का सृजन कर सम्पूर्ण विश्व को आकर्षित करने वाले कलाकारों की एक लम्बी सूची राजस्थान में कार्यरत हैं जिसमें छोटू लाल, शैल चौपल, युगल किशोर उपाध्याय, रामेश्वर बरूटा, ललित र्श्मा, प्रभा शाह, लालचंद मरोठिया, चरन शर्मा, किरण मुर्डिया आदि अनेक नाम शामिल हैं।

Last modified: 2020-07-18 20:51:49