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आर्थि क विकास एव ं जल प्रदूषण तथा जल संरक्षण

Journal: INTERNATIONAL JOURNAL OF RESEARCH -GRANTHAALAYAH (Vol.3, No. 9)

Publication Date:

Authors : ;

Page : 1-2

Keywords : आर्थि क विकास एव ं जल प्रदूषण तथा जल संरक्षण;

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Abstract

आर्थिक विकास करना मन ुष्य न े सदा से चाहा ह ै। यह भी तथ्य है कि स्वच्छ पर्यावरण के बिना मन ुष्य का जीवन अकल्पनीय ह ै। मन ुष्य और पर्यावरण क े इस रिष्त े में किसी भी हिस्से को बड ़ी चोट न केवल इस रिष्ते को खतर े म ें डाल द ेती ह ै बल्कि दोनों के अस्तित्व भी खतर े में पड ़ जात े हैं। पर्यावरण बिगड ़ेगा ता े मानव जीवन प्रभावित हा ेगा। इसका यह अर्थ नहीं ह ै कि आर्थिक विकास की कीमत पर पर्या वरण बचायें या पर्यावरण की कीमत पर आर्थिक विकास हासिल कर ें। दोनों के बीच एक संत ुलन की आवष्यकता ह ै ताकि मानव जीवन सुरक्षित बना रहे आ ैर लाभांवित भी हो। दोनों का केन्द ्र मानव ही है। प ्रकृति आ ैर मानव पृथ्वी पर जीवन के दो पहलू हंै। दा ेनों को अलग-अलग कर नहीं द ेखा जा सकता। आर्थिक विकास की चाह का र्कोइ अन्त नहीं है। यह अनन्त है जबकि प ्राक ृतिक संसाधन न ता े अन्तहीन ह ै और न ही उनका ए ेसा सटीक विकल्प त ैयार किया जा सकता है जो वर्त मान तथा भविष्य में बढ ़न े वाली जनसंख्या की आवष्यक्ताओं को प ूरा कर सके। यदि मन ुष्य प्राक ृतिक संसाधनों का उपयोग सा ेच समझ कर कर े तो वे अधिक समय तक चलेंगे अन्यथा त ेजी से उपयोग करन े पर व े षीघ्र समाप्त हो जाये ंगे।

Last modified: 2017-09-25 19:02:31